हवा का ज़ोर ही - Hawa Ka Zor Hi (Hariharan, Visaal) – (हिन्दी में लिरिक्स)
Movie/Album: विसाल (1996)
Music By: हरिहरन
Lyrics By: शहरयार
Performed By: हरिहरन
हवा का ज़ोर ही काफ़ी बहाना होता है
अगर चराग़ किसी को जलाना होता है
हवा का ज़ोर ही...
ज़ुबानी दावे बहुत लोग करते रहते हैं
जूनूँ के काम को कर के दिखाना होता है
अगर चराग़...
हमारे शहर में ये कौन अजनबी आया
कि रोज़ ख़्वाब सफ़र पे रवाना होता है
अगर चराग़...
के तू भी याद नहीं आता, ये तो होना था
गए दिनों को सभी को भुलाना होता है
अगर चराग़...
Music By: हरिहरन
Lyrics By: शहरयार
Performed By: हरिहरन
हवा का ज़ोर ही काफ़ी बहाना होता है
अगर चराग़ किसी को जलाना होता है
हवा का ज़ोर ही...
ज़ुबानी दावे बहुत लोग करते रहते हैं
जूनूँ के काम को कर के दिखाना होता है
अगर चराग़...
हमारे शहर में ये कौन अजनबी आया
कि रोज़ ख़्वाब सफ़र पे रवाना होता है
अगर चराग़...
के तू भी याद नहीं आता, ये तो होना था
गए दिनों को सभी को भुलाना होता है
अगर चराग़...