साथ हम रहें - Saath Hum Rahein (Jubin Nautiyal, Drishyam 2) – (हिन्दी में लिरिक्स)
Movie/Album: दृश्यम 2 (2022)
Music By: देवी श्री प्रसाद
Lyrics By: अमिताभ भट्टाचार्य
Performed By: जुबिन नौटियाल
जले जब सूरज, तब साथ हम रहें
ढले जब चंदा, तब साथ हम रहें
हँसी जब छलके, तब साथ हम रहें
हो भीगी पलकें, तब साथ हम रहें
खुद की परछाइयाँ, चाहे मुँह मोड़ लें
वास्ता तोड़ लें, तब भी साथ हम रहें
है हमें क्या कमी, हम बिछा कर ज़मीं
आसमाँ ओढ़ लें, यूँ ही साथ हम रहें
जले जब सूरज...
खुशरंग जिस तरह है ज़िंदगी अभी
इसका मिज़ाज ऐसा ही
उम्र भर रहे, उम्र भर रहे
भूले से भी नज़र, लग जाए ना कभी
मासूम खूबसूरत
इस कदर रहे, इस कदर रहे
जो बदल छाएँ, तब साथ हम रहें
बहारें आएँ, तब साथ हम रहें
जले जब सूरज...
दिन इत्मिनान के, या इम्तिहान के
जो भी नसीब हों
मिल के बाँटते रहे, बाँटते रहें
काँटों के बीच से, थोड़ा संभाल के
नाज़ुक सी पत्तियाँ
मिल के छाँटते रहें, छाँटते रहें
दिखे जब तारे, तब साथ हम रहें
बुझे जब सारे, तब साथ हम रहें
जले जब सूरज...
Music By: देवी श्री प्रसाद
Lyrics By: अमिताभ भट्टाचार्य
Performed By: जुबिन नौटियाल
जले जब सूरज, तब साथ हम रहें
ढले जब चंदा, तब साथ हम रहें
हँसी जब छलके, तब साथ हम रहें
हो भीगी पलकें, तब साथ हम रहें
खुद की परछाइयाँ, चाहे मुँह मोड़ लें
वास्ता तोड़ लें, तब भी साथ हम रहें
है हमें क्या कमी, हम बिछा कर ज़मीं
आसमाँ ओढ़ लें, यूँ ही साथ हम रहें
जले जब सूरज...
खुशरंग जिस तरह है ज़िंदगी अभी
इसका मिज़ाज ऐसा ही
उम्र भर रहे, उम्र भर रहे
भूले से भी नज़र, लग जाए ना कभी
मासूम खूबसूरत
इस कदर रहे, इस कदर रहे
जो बदल छाएँ, तब साथ हम रहें
बहारें आएँ, तब साथ हम रहें
जले जब सूरज...
दिन इत्मिनान के, या इम्तिहान के
जो भी नसीब हों
मिल के बाँटते रहे, बाँटते रहें
काँटों के बीच से, थोड़ा संभाल के
नाज़ुक सी पत्तियाँ
मिल के छाँटते रहें, छाँटते रहें
दिखे जब तारे, तब साथ हम रहें
बुझे जब सारे, तब साथ हम रहें
जले जब सूरज...